टाइटैनिक जहाज कैसे डूबा था ? टाइटैनिक जहाज का रहस्य

टाइटैनिक जहाज कैसे डूबा था  ? दोस्तों आज हम एक ऐसी रहस्यमय घटना के बारे में जानेंगे। टाइटैनिक जहाज कैसे डूबा जिसने विज्ञान जगत में हड़कंप मचा दिया था। उस घटना का नाम है। टाइटैनिक जहाज का पहली ही यात्रा के दौरान क्षतिग्रस्त होना।

जब भी हम टाइटैनिक के बारे सुनते या पढ़ते है, तब ये सवाल जरूर मन में आता है। कि टाइटैनिक जहाज कैसे डूबा था? क्यूंकि इसका डूबना, विज्ञान कि तकनीक पर  सवाल खड़ा कर देता है।

ये समुंदर का एक विशाल और भयानक हादसा था। दुनिया का विशाल पानी का जहाज अंटलांटिक महासागर में देखते ही देखते समा गया था। इस जहाज को कभी ना डूबने वाला जहाज भी कहा गया था। लेकिन बुरे वक़्त ने ऐसी दस्तक दी।

की टाइटैनिक अपनी पहली ही यात्रा के दौरान मौत की गोद में समा गया। इस घटना को titanic movie के जरिए इस घटना के बारे में लोगो को दिखाया गया। कि कैसे इतना विशाल पानी का जहाज कैसे डूबा था? जिस देख कर लोग आज भी भावुक ही उठते है।

titanic ship

टाइटैनिक जहाज का परिचय – टाइटैनिक जहाज कैसे डूबा था ?

19वी शताब्दी में इस जहाज का निर्माण शुरू हुआ था। इस आलीशान और भव्य जहाज का निर्माण ब्रिटेन सरकार ने करवाया था। ब्रिटेन सरकार ने इस जहाज को बनाने का जिम्मा  white star line कम्पनी को दिया था ।

16000 Engineers और 4000 श्रमिको ने इस जहाज को बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। कुल 26 महीनों में इस जहाज को त्यार करने कार्य पूरा कर लिया गया था । ये जहाज 16 अलग अलग कंपार्टमेंट में बना था। इसके हर कंपार्टमेंट को वॉटर प्रूफ या वॉटर टाईट बनाया गया था। इसी लिए इस जहाज को कभी ना डूबने वाला जहाज भी कहा गया था।

टाइटैनिक जहाज की पहली यात्रा कब शुरू हुई?

2 अप्रैल 1912 को ये जहाज बिलकुल बन कर यात्रा के लिए त्यार हो चुका था। जिसका नाम titanic रखा गया । 10 अप्रैल 1912 को टाइटैनिक की पहली यात्रा शुरू हुई ।  10 अप्रैल 1912 को टाइटैनिक अपनी पहली यात्रा में 1920 यात्रियों को लेे कर रवाना हुआ।

जो कि रवानगी इंग्लैंड के साउथ हेप्टों से अमेरिका के न्यूयार्क तक थी । ये जहाज पानी में 45 km/ h की स्पीड से चल रहा था। इस जहाज को उस वक़्त देखने के लिए 1 लाख से भी ज्यादा लोग बंदरगाह पर एकत्रित हुए थे।

45 km/h की गति से टाइटैनिक शाम को फ्रांस के शेबुर्ग शहर पहुंचा, जहां से 274 यात्री और टाइटैनिक जहाज में रवाना हुए।

उसके बाद टाइटैनिक क्वीनस्टन आयरलैंड पहुंचा और वहां से 123 यात्रियों के साथ अपनी मंजिल न्यूयॉर्क के लिए रवाना हो गया था।

टाइटैनिक जहाज कैसे डूबा ?

 

titanic ship Drowning

 

 

टाइटैनिक कैप्टन की लापरवाही और तेज़ गति से  जहाज बर्फ की चट्टान से टकराने के कारण से डुबा था।

जब अपनी मंजिल की तरफ बाद रहा था। तब जहाज के कैप्टन को एक भारी बर्फ की चट्टान होने की चेतावनी मिली, लेकिन कैप्टन इस टाइटैनिक जहाज की स्पीड का रिकॉर्ड बनाना चाहता था। इस लिए कैप्टन ने जहाज को धीमा नहीं किया। उसके बाद रात 11.40 पर जहाज पूरी तेज़ गति से उस हिम शिला से टकरा गया।

उस भयानक टक्कर की वजह से जहाज की निचली प्लेट टूट गई। जिस से जहाज के निचले 4 कंपार्टमेंट में पानी भर गया था। और 400 फीट तक जहाज की कीले निकाल कर पानी में गिरने लगी 3rd क्लास कंपार्टमेंट में पानी भरने लगा, जिस करके जहाज के सभी यात्री उपर के compartment में भागने लगे।

Thomas Andrews

जिसने ये जहाज डिजाइन किया था। उन्होंने बताया कि जहाज के 5 से ज्यादा कंपार्टमेंट में पानी भर गया है। जो कभी भी जहाज को पूरा पानी में डूबो सकता है। यात्रियों कि जान बचाने के लिए लाइफ boat निकाली जा रही थी।

लेकिन दुर्भाग्य वश उस वात सिर्फ 20 ही life boats थी। जिसमे मुश्किल से 60-70 ही यात्रियों को ले जाया जा सकता था। धीरे धीरे जहाज में पानी का दबाव बढ़ने लगा और 2.20 मिनट्स पर जहाज में दबाव इतना बढ़ गया। कि जहाज के 2 टुकड़े हो गया और देखते ही देखते कभी ना डूबने वाला जहाज मौत के मुंह में समा गया।

ये हादसा इतना भयानक था, कि इस हादसे में 1517 लोगो की जान गई थी और अधिकांश मौत पानी में जमने के कारण से हुई थी। क्यूंकि समुंदर का पानी -2 डीगरी ठंडा था। इस घटना में 680 कुछ ही यात्री जिंदा बचे थे, जिनकी किस्मत अच्छी थी।

टाइटैनिक के डूबने के कुछ काल्पनिक तथ्य

टाइटैनिक के डूबने के और 3 कारण बताए जाते है। जिन को अलग अलग खोज एंजेसियों ने बताया है।

1 टाइटैनिक के डूबने का कारण कैप्टन कि लापरवाही बताया गया है, कि कैप्टन ने जहाज की गति और सूचना को अनदेखा किया था।

2 दूसरा कारण कोयला बंकर में लगी आग को बताया गया है।

3 जहाज में प्रयोग हुए खराब मेटेरियल को जहाज के डूबने का कारण बताया है।

Melony वरिष्ठ पत्रकार जिनॉने टाइटैनिक फिलम बनाई थी। melony ने अपनी डॅाकमेंट्री में जहाज के डूबने का कारण जहाज का हिमशिला से टकराना और कोयला बंकर में लगी आग को बताया था। कोयला बंकर में आग इतनी भयंकर लगी थी, कि जहाज की निचली सतह गरम होने के कारण कमजोर हो गई थी। जिस से वो टक्कर से जल्दी टूट गई।

2010 में एक टीम फिर गठित हुई, टाइटैनिक की रिसर्च के लिए उस टीम ने करोड़ों डॉलर खर्च कर के रोबोट hd camera की मदद से समुंदर k 15 se 20 kilometer के area में 1 से 2 लाख फोटो और वीडियो लिए और टाइटैनिक के छोटे छोटे टुकड़ों को इकठ्ठा करके एक अध्ययन किया और 2 साल की रिसर्च के बाद पाया गया, कि टाइटैनिक में होने वाला मेटेरियल अच्छी क्वालिटी का था।

टाइटेनिक का हादसा आज भी किसी को बताया जाए, तो रूह तक कांप जाती है। टाइटैनिक जहाज कैसे डूबा था ये इतिहास के बड़ी घटना में से एक थी। जिसको इतिहास के लिए भुला पाना मुश्किल होगा।

 

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