20 अनोखे ताज महल के रहस्य ।ताजमहल का इतिहास | आगरा का ताजमहल

ताज महल का रहस्य भारत एक प्राचीन काल से प्रसिद्ध देश रहा है जिस का इतिहास आज भी एक गौरवशाली प्रतिभा के रूप में उभर कर आता है क्योंकि भारत में प्राचीन काल से हो बहुत ही दुर्लभ चीजें उत्पन्न और बनाई गई है जो आज भी इस विज्ञान के युग में अपने आप में एक अनोखी हैं भारत में ऐसे बहुत से इतिहासिक इमारतें किले महल इत्यादि शामिल है जोकि भारत के इतिहास को और भी पुख्ता और मजबूत कर देते हैं

और भारत में एवं महल और इमारतों के बारे में आज भी लोग दुनिया भर के जानना चाहते हैं क्योंकि मैं इमारतें आज भी प्राचीन काल के इतिहास को दोहराते हैं जोकि आज तक पर्यटन के लिए और खोजकर्ता के लिए एक दिलचस्प रोमांचकारी चीज के रूप में कौन हुई है तो आज हम भारत के ऐसे ही इतिहास के पन्नों पर लिखे गए नाम ताजमहल के बारे में आपको बताएंगे ताज महल का रहस्य

ताजमहल का इतिहास | आगरा का ताजमहल |ताजमहल किसने बनवाया था

ताज महल का रहस्य जोकि बहुत से लोगों के ज्ञान से ओझल है ताजमहल भारत के लिए इतिहासिक और गौरवशाली इमारत है जिस के चर्चे आज भी पूरे विश्व में हैं और देश विदेश से दुनिया इस अनोखे ताजमहल को देखने आती है लेकिन जो आज हम आपको ताज महल के बारे में बताने जा रहे हैं वह ताजमहल की गहराई की बातें हर किसी को नहीं पता होगी

बहुत से लोग ताज महल का रहस्य नहीं जानते है कि जो ताजमहल को सामने से देख रहे हैं वह असल में ताजमहल का पिछला हिस्सा है दरअसल जो शाही दरवाजा है है वह नदी के किनारे दूसरी तरफ है आज ज्यादातर टूरिस्ट ताज को वैसा नहीं देख पाते जैसा कि शाहजहां चाहते थे मुगल काल में ताजमहल तक पहुंचने के लिए नदी की मुख्य रास्ता थी यह एक तरह का हाईवे था

बादशाह और उनके शाही मेहमान नाव में बैठकर आते थे नदी के किनारे एक चबूतरा हुआ करता था नदी बढ़ती गई और वह बहुत पहले ही नष्ट हो गया बादशाह और उनके मेहमान उस रास्ते से जाया करते थे यह कहा जाता रहा है कि शाहजहां ने ताजमहल बनाने वाले मजदूरों के हाथ कटवा दिए थे

क्या ताजमहल बनाने वाले करीगरों के हाथ काट दिए गए थे

लेकिन यह बात एक अफवाह जैसी लगती है क्योंकि इस बात का कोई प्रमाण मौजूद नहीं है बहुत से इतिहासकारों का मानना है कि शाहजहां ने मजदूरों और कारीगरों को जिंदगी भर की पगार देकर उनसे करारनामा लिखवाया था कि वह ऐसी कोई दूसरी इमारत नहीं बनाएंगे

ताजमहल की जो चार मीनारें हैं यह बिल्कुल सीधी नहीं खड़ी है बल्कि चारों बाहर की और हल्की झुकी हुई है और इन्हें ऐसा ही बनाया गया था ताकि भूकंप जैसी आपदा आने पर अगर यह गिरे भी तो बाहर की और गिरे और मुख्य मकबरे को कोई नुकसान ना पहुंचे

कुतुबमीनार भारत की सबसे ऊंची मीनार है लेकिन शायद आपको जानकर हैरानी हो ताजमहल की ऊंचाई कुतुब मीनार से भी ज्यादा है ताजमहल 73 मीटर ऊंचा है जबकि कुतुब मीनार की ऊंचाई 72 पॉइंट 5 मीटर है

ताजमहल कहां है?

ताजमहल Dharmapuri, Forest Colony, Tajganj, Agra, Uttar प्रदेश में बना है जो की पर्यटक का केन्डर बना है जहाँ देश विदेश से पूरी दुनिया ताजमहल को देखने को आती है

दुनिया में जितने भी इतिहासिक इमारतें मौजूद हैं उनमें से सबसे सुंदर कैलीग्राफी ताज महल पर हुई है जैसे ही आप ताज के बड़े दरवाजे से अंदर जाते हो दरवाजे पर लिखा यह सुलेख आपका स्वागत करता हैआत्मा तू ईश्वर के पास विश्राम कर ईश्वर के पास शांति के साथ रहे और उसकी परम शांति तुझ पर बरसे यह कैलीग्राफी फ्लूट लिपि में है इस कैलीग्राफी को डिजाइन कर अपने वाले का नाम अब्दुल हक था जिसे ईरान से बुलाया गया था शाहजहां ने उसकी चकाचौंध कर देने वाली कला को देखते हुए उसे अमानत का नाम दिया था

जिस वक्त शाहजहां बादशाह बने वह मुगल सल्तनत का सबसे सुनहरा दौर था या यूं कहें शाहजहां का जमाना मुगल हुकूमत की बसंत जैसा था। चारों तरफ अमन और खुशहाली थी प्रजा के लिए बादशाह का हुकुम ही सबसे ऊंचा होता था। शाहजहां कि हकुमत में लड़ाइयां नहीं होती थी वह जबरदस्त शानो शौकत आशीष का दौर था। बादशाह को बड़ी-बड़ी इमारतें बनवाने का शौक था। उन्होंने मुगल वास्तुकला के साथ भारत के प्राचीन इतिहास को मिला दिया था।

ताजमहल किस पत्थर से बना है?

ऐसी भव्य इमारत दुनिया ने पहले कभी नहीं देखी थी। इसके लिए सफेद संगमरमर राजस्थान के मकराना से लाया गया था। जरूर क्रिस्टल चाइना से मंगवाया गया था। और चमकदार पत्थर अफगानिस्तान से आया था और कोई तिब्बत से जसपुर पंजाब से सफायर श्रीलंका से और कार्नेलियन अरब से आया था। कुल मिलाकर ऐसे ही 28 किस्म के बेशकीमती रत्नों को सफेद संगमरमर में जड़ा गया था। इन सब चीजों को विदेश से आगरा लाने के लिए 1000 से भी ज्यादा हाथी इस्तेमाल किए गए थे।

ताजमहल का निर्माण कब हुआ था?

प्राचीन ताजमहल आज से करीब 400 साल पहले 1631 में बनना शुरू हुआ था। और यह 22 साल बाद 1653 में पूरा हुआ इसका निर्माण 20000 कारीगरों और मजदूरों ने किया था। वास्तुकला का इससे शानदार नमूना दुनिया में दूसरा कोई भी नहीं ताजमहल के निर्माण के लिए हर चीज को परख कर चुना गया था। ताजमहल की दीवारों पर जो नक्काशी है इसकी तकनीक इटली के कारीगरों से सीखी गई थी। उसमें किस्तान के बुखारा से संगमरमर को तलाश वाले कारीगर बुलाए गए थे। इरान से संगमरमर पर कैलीग्राफी करने वाले कारीगर आए थे और पत्थर को तराशने के लिए बलूचिस्तान के कारीगरों को बुलाया गया था।

प्राचीन ताजमहल को नुकसान

1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों ने ताज को काफी नुकसान पहुंचाया उन्होंने  कई बेशकीमती रत्नों को ताजमहल की दीवारों से खोदकर निकाल लिया था। ताजमहल के मुख्य गुंबद का जो कलश है किसी जमाने में वह सोने का हुआ करता था। 19वीं सदी की शुरुआत में सोने के कलश को बदलकर कांसे का कलश लगाया गया। दावे के साथ नहीं कहा जा सकता कि ताजमहल को किसने डिजाइन किया था। लेकिन यह कहा जाता है इस 37 लोगों की टीम ने मिलकर ताजमहल का नक्शा तैयार किया था इस वास्तुकार दुनिया के दूर-दूर के कोनो से बुलाए गए थे।

प्राचीन ताजमहल की नींव बनाते समय ताज के चारों और बहुत से कुएं खोदे गए। इनमे एक पत्थर के साथ-साथ आबनूस और महोगनी की लकड़ियों के लट्ठे डाले गए। यह ताजमहल की नींव को मजबूत बनाते हैं।  महोगनी की लकड़ियों में यह खासियत होती है कि इन्हें जितनी नमी मिलती रहेगी उतनी ही फौलादी और मजबूत रहेगी और इन लकड़ियों को नमी ताज के पास बहने वाली यमुना नदी के पानी से मिलती है। यमुना के पानी का स्तर हर साल घट रहा है और लकड़ियों में नमी की कमी आ गई है। यही वजह है कि सन 2010 में ताज में दरारें देखी गई।

ताजमहल किसने बनवाया था?

ताजमहल को मुग़ल सल्तनत के राजा शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज़ की याद में बनवाया था

1653 में जब ताज बनकर तैयार हुआ था। उस समय इसके निर्माण की कीमत करोड़ों में आंकी गई थी। उसी हिसाब से अगर आज ताज बनवाया जाए तो इसे बनाने में कम से कम 57 अरब ₹600000000 लगेंगे।

1989 में एक भारतीय लेखक पीएमोक ने एक किताब लिखी थी। नाम था ताजमहल द true स्टोरी इस किताब में उन्होंने कहीं तर्कों के साथ यह दावा किया था। कि ताजमहल मकबरा बनने से पहले एक शिव मंदिर था। और इसका नाम तेजो महालय था। सन 2000 में ओक ने अपनी बात को सिद्ध करने के लिए ताज की साइट खोजने के लिए सुप्रीम कोर्ट को अर्जी दी थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के मुताबिक ताजमहल कभी एक शिव मंदिर था। इस बात के कोई सबूत नहीं है बल्कि शाहजहां ने ताज को बनवाया था इसके प्रमाण ही इतिहास के पन्नों में मिलते हैं।

ताज महल का रहस्य एक प्रसिद्ध कहानी के रूप में है। कि शाहजहां यमुना नदी के दूसरी तरफ काले संगमरमर से ऐसा ही एक और काला ताजमहल बनाना चाहते थे कहा जाता है कि शाहजहां मुमताज की तरह अपने लिए भी एक मकबरा बनाना चाहते थे। लेकिन इससे पहले कि वह काला ताजमहल बनवा पाए औरंगजेब ने उनको कैद खाने में डलवा दिया। लेकिन इतिहासकार कहते हैं कि यह बाद में बनाई गई मनगढ़ंत कहानियां है। जिस जगह शाहजहां के काला ताज बनवाने की बात कही जाती है। वहां कई बार खुदाई की जा चुकी है। लेकिन ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला जिससे यह पता चले कि शाहजहां का लात आज बनवाना चाहते थे।

ताजमहल का डिजाइन

ताजमहल का डिजाइन जाा हुमायूं के मकबरे से प्रेरित दिखता है हुमायूं शाहजहां के परदादा थे। फुल उनका यह मकबरा हिंदुस्तान में आगे बढ़ने वाली कई मुगल इमारतों के लिए प्रेरणा बना । दूसरे विश्व युद्ध में सरकार ने मकबरे के चारों ओर बांस का घेरा बनाकर सुरक्षा कवच तैयार कराया था। जिससे कि हवाई  को भ्रमित किया जा सके ओरिया जर्मन और जापानी हवाई हमलों से सुरक्षा प्रदान कर पाए 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय भी यही किया गया था।

कई देशों में ताजमहल की नकल पर बनी इमारतें मौजूद है। जैसे चीन बांग्लादेश और कोलंबिया में और ऐसी एक इमारत भारत में भी मौजूद है। बीबी का मकबरा यह इमारत महाराष्ट्र के औरंगाबाद में है इसे मुगल बादशाह ने अपनी मां दिलरस बानो बेगम की याद में 17 वी सदी के आखिर में बनवाया था। इसे ताजमहल की तर्ज पर बनवाया गया था। इस मकबरे का ताजमहल के गुंबद से छोटा है इस मकबरे का गुंबद ताजमहल के गुंबद से छोटा है और इसका सिर्फ गुंबद ही संगमरमर का है। बाकी निर्माण प्लास्टर से किया गया है।

ताजमहल की लोकप्रियता

ताजमहल की सबसे ज्यादा लोकप्रिय था। इसके निर्माण से जुड़ी अद्भुत प्रेम कहानी की वजह से है। बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में इस इमारत को बनवाया था। मुमताज का असली नाम  बानो बेगम था। शाहजहां ने उन्हें मुमताज महल नाम दिया यानी महल का सबसे अनमोल रत्न महज 38 साल की उम्र में अपनी 14वीं संतान को जन्म देते वक्त मुमताज की मृत्यु हो गई। उस वक्त वह बुरहानपुर में थी अपनी प्रिय बेगम की मृत्यु से बादशाह बेहद दुखी हुए जैसे उनकी जिंदगी तबाह हो गई और आखिर उनकी याद में शाहजहां ने ताज को बनवाने का फरमान जारी किया।

पहले पहले मुमताज को बुरहानपुर में ही दफनाया गया इसके बाद शाहजहां ने ताज को बनवाना शुरू किया तब बुरहानपुर से मुमताज के शव को निकालकर जहां ताजमहल बन रहा था उसके पास एक बगीचे में दफनाया गया ताजमहल को तैयार होने में 22 साल लगे तब तक मुमताज का शव बगीचे में बनाई गई कब्र में ही दफन रहा बाद में से ताज महल के अंदर मुख्य गुंबद के नीचे दफनाया गया।

शाहजहां को कैद

शाहजहां का सारा ध्यान ताज को एक खूबसूरत रूप देने में लगा रहा। इसी बीच शाहजहां के ही बैठे औरंगजेब ने आगरा पर हमला कर अपने पिता को कैद कर लिया। शाहजहां से पूछा गया कि वह क्या चाहते हैं। तो उन्होंने कहा कि उनको ऐसी जगह पर कैदी बनाकर रखा जाए जहां से वह सीधे ताज को देख पाए और उनकी ख्वाहिश पूरी कर दी गई कैद में रहते हुए भी शाहजहां हर वक्त ताज को देखते रहते और वही उन्होंने अपनी जिंदगी की आखिरी सांस ली मौत होने के बाद उन्हें मुमताज के साथ ही ताजमहल में दफनाया गया।

ताजमहल

कभी रविंद्र नाथ टैगोर ने ताजमहल के बारे में लिखा है। कि वक्त के गाल पर एक आंसू हमेशा हमेशा के लिए उन्होंने ताज की छवि वक्त के गाल पर एक थामे हुए आंसू के रूप में बयान की है। शाहजहां जानते थे कि यह दौलत यह ताकत और यह शानो शौकत एक दिन सब खत्म हो जाएगा। उन्होंने सोचा कि कुछ ऐसी यादगार चीज बनाई जाए जो हमेशा रहे और शाहजहां ने अपनी प्रिय की याद में ताज को बनवाया। आज बादशाह नहीं रहा उनकी हुकूमत नहीं रही और उसकी सल्तनत को भी खत्म हुए कई जमाने गुजर गए बस एक ताज है जिसने बादशाह की सदियों पुरानी प्रेम कहानी को खुद में संजोए रखा है। प्रकृति की गोद में चांद से जगमगाती भव्य इमारत सदियों से दो प्रेमियों के प्यार की अमर कहानी सुनाती आई है ताज महल का रहस्य।

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