Kuldhara Story in Hindi : राजस्थान के कुलधरा गांव का रहस्य, इतिहास

Kuldhara Story in Hindi – भारत में कई जगह है जो समय के साथ कई कारणों के चलते चर्चा में बनी रहती हैं उन्हीं में से एक है राजस्थान में बरसात छोटा सा कुलधरा गांव कहा जाता है यह गांव पिछले बहुत सालों से शापित हो रखा है लेकिन सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या हुआ था कि एक रात में 84 गांव के लगभग 600 घरों के लोग अचानक हो गए और कहां गए उसका कोई नहीं पता क्यों आखिर एक गांव पूरी तरह बंजर और वीरान हो चुका है आखिर ऐसी कौन सी बात है जिसकी वजह से आज कुलधरा गांव में कोई नहीं रहता पर आज हम कुलधरा गांव के रहस्य को थोड़ा सा जानने की कोशिश करेंगे

दोस्तों अगर आप कभी वहां जाएंगे तो जर्जर हालातों में पड़े खंडहर आज उस घटना की गवाही देते हुए नजर आएंगे खंडहर में तब्दील कर दिया था यह कुलधरा गांव आज वैसा नहीं है जैसा पहले कभी हुआ करता था दोस्तों आज से लगभग 200 साल से कुलधरा गांव खाली पड़ा हुआ है जो कभ सभी सुख सुविधाओं से लैस हुआ करता था आपको बता दें कि भारत में सबसे डरावनी जगह है उन जगहों में कुलधरा गांव भी शामिल थे

Kuldhara Story in Hindi – कुलधरा गांव का रहस्य

एक ही रात में 84 गांव के लगभग 600 घरों की लोग अचानक गायब हो गए और कहाँ गए किसी को नहीं पता जिस गांव को छोड़कर गए उस गांव का नाम है कुलधरा जिसे की एक श्रापित गांव माना जाता है और इसके वीरान होने के पीछे कौन कौन से कारण थे उस गांव के स्थापित होने के और क्या ऐसा राज आज भी उस गांव में दफन हैं आज मैं उन कारणों पर रोशनी डालने की कोशिश करूंगा लगभग 200 सालों से कुलधरा वीरान पड़ा है जो कभी एक सारी सुविधाओं से लैस हंसता खेलता गांव था वह आज बंजर पड़ा है और आप सिर्फ एक खंडहर का इतिहास बनकर रह गया है हिंदुस्तान में सबसे डरावनी भूतिया जगह है उसका नाम दूसरे नंबर पर आता है

Kuldhara Village Ghost Story in Hindi 

गांव में भूत प्रेत का साया है रात को उस गांव से कभी किसी बच्चे की रोने की तो कभी और तू के चूड़ियों की खनक ने की आवाज आती है कई लोग यह बता देंगे जब वह अपनी गाड़ी से वहां घूमने गए और उसके बाद जब वापस लौटे तो उन्हें अपनी गाड़ियों के शीशों पर बच्चों के पंजों के निशान मिले राजस्थान सरकार ने गांव के चारों तरफ 2 किलोमीटर की दूरी पर एक बाउंड्री बना दी है और एक बड़ा सा गेट भी बनवा दिया है

kuldhara story in hindi

अब कोई भी वहां दिन में तो घूमने जा सकता है पर सूरज ढलते ही आपको वहां से जाने के लिए कह दिया जाएगा शाम को 4:00 बजे के बाद बिल्कुल नहीं रुक सकते और यहां तक कि रात में वहां पर कोई कार्ड भी नहीं रुकता अगर इतिहासकारों की बात करें तो किस बात को सच मानते हैं जिस तरह से गांव एक रात में खाली हो गया

कुलधरा का इतिहास 

राजस्थान के जैसलमेर शहर जिसे की गोल्डन सिटी भी कहा जाता है बहुत ही खूबसूरत शहर है और वहां की हर चीज चाहे वह मकान हो दुकान हो या कोई और इमारत या वहां का मशहूर किला सभी चीजें आपको वहां गोल्डन येलो कलर में मिलेगी जैसे ही सुबह की पहली किरण जैसलमेर पर पड़ती है पूरा शहर सोने की तरह चमकने लगता है जैसलमेर खुश होने का शहर भी कहा जाता है जैसलमेर से 18 किलोमीटर की दूरी पर कुलधरा गांव बसा हुआ है और जैसलमेर से कुलधरा का सफर बड़ा ही वीरान सा है पूरा रोड आपको सुनसान मिलेगा

आपको बड़ी मुश्किल से 5 किलोमीटर बाद आपकी गाड़ी के अलावा कोई और दूसरी गाड़ी दिखेगी जब आप वहां पहुंचेंगे तो गेट से एंट्री करते ही आपको कुछ अजीब सा महसूस होगा ऐसा लगेगा जैसे कि मानो किसी दूसरी दुनिया में आ गए हो और अचानक से तापमान में गिरावट आने देगी अगर आप गर्मियों की दोपहर में भी वहां जाएंगे तो आपको गर्मी का एहसास नहीं होगा वहां पर घूमने गए लोग बताते हैं

कि कई बार उन्हें ऐसा एहसास होता है जैसे किसी ने उनके कंधे पर हाथ रखा हो पर आप कोई नहीं होता ऐसा लगता है मानो कुछ लोगों के हसने और औरतों हसीं ठिठोली कर रही हो और लोगों  की आवाज अक्सर वहां आती रहती है

कुलधरा गांव का डिज़ाइन और स्ट्रक्चर 

इतिहासकारों और वहां के स्थानीय निवासियों का कहना है इतिहासकारों और भारतीय स्थानी निवासियों का कहना है कि लगभग सन 1291 में जैसलमेर से 18 किलोमीटर दूर कुछ किलोमीटर के एरिया में पालीवाल ब्राह्मणों ने कुलधरा गांव को बताया था 84 गांव के 600 घरों के लोग एक साथ मिलकर रहते थे पालीवाल जाति के लोग बहुत ही होनहार पढ़े-लिखे रहे और बहुत ही मेहनती थी इन लोगों का दिमाग बहुत ही तेज था और यह लोग अच्छे वैज्ञानिक की माने जाते थे इन लोगों ने उस जमाने में भी बहुत ही नई तकनीकों का इजाद किया था इन्होंने बहुत ही ज्ञानिक तरीकों से अपने घर बना रखे थे

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और और काफी घर आज भी वहां मौजूद है और यह अभी भी बिल्कुल नए जैसे लगते हैं गर्मी में 45 डिग्री के तापमान में भी उन घरों के अंदर ठंडी हवाएं आती है और जानवरों को पालना और खेती करना था पाली वालों ने एक ऐसी तकनीकी जांच की थी कि बारिश का पानी रेत के जरिये एक खास गहराई पर जाकर जमा हो जाता था जिसकी वजह से  मैदान रेगिस्तान में भी फसल आने में कामयाब हुई वह भी कोई मामूली फसल नहीं बहुत ही उम्दा किस्म की फसलें तालाब बनाए थे जिससे खेती करते थे

कुलधरा की विरानता का कारण दीवान सालम सिंह

आखिर ऐसा क्या हुआ कि कितना और विकसित गांव एक रात में ही वीरान हो गया  उसका कारण था जैसलमेर का दीवान सालम सिंह सालम सिंह बहुत ही खूब दीवान था और कुलधरा गांव की उसी के प्रशासन में आता था और उसके गुरूर होने के पीछे भी एक कहानी है दरअसल जब 11 साल का था तब उसी की नजरों के सामने किसी राजद्रोह के आरोप में उसके पिता की गर्दन काट दी गई थी उसके पिता भी जैसलमेर के सोनार किले में दीवान थे उसी घटना ने सालम सिंह को इतना क्रूर और निर्दई बना दिया था

उसके बाद से ही वह सोनार किले पर कब्जा करना चाहता था और पूरे राज्य को हथियाना चाहता था उसने सोनार से कुछ कदमों की दूरी पर ही अपना भी महल बनवाया और उसने अपने किले की ऊंचाई सोनार किले से भी करवा दी पर वहां के राजा को यह बात पसंद नहीं आई थी और राजा ने सालम सिंह के महल के ऊपर की दो मंजिलों को तुड़वा दिया सालम सिंह कद काठी में किसी हैवान से कम नहीं था और उसके कपड़े आज भी वहां मौजूद है

सालम सिंह और लड़की का किस्सा

सालम सिंह औरतों में भी बहुत बदनाम था और  उसका नाम सुनकर भी कांप जाती थी कोई भी औरत उसके महल की परछाई से भी वह कर नहीं गुजरना चाहती थी एक बार सालम सिंह कुलधरा गांव का दौरा कर रहा था तो अचानक उसकी नजर वहां के पुजारी की बेटी पर पड़ी और उसकी नियत खराब हो गई उस लड़की को पाने के लिए उसने बहुत कोशिश की और अलग-अलग तरह के लगान लगाएं ताकि पालीवाल ब्राह्मण के सामने झुके और वह भी मंशा पूरी कर सके पर पालीवाल ब्राह्मण बहुत ही उन्नत और रही थी और इस वजह से उसकी चाल कामयाब नहीं हो पाई

यहां तक कि उसने उस लड़की को कई बार उठाने की कोशिश भी की पढ़ो उसमें भी कामयाब नहीं हो पाया आखिरकार जब उसे कोई कामयाबी हासिल नहीं हुई और उस लड़की को पाने की चाहत उसके मन में इतनी बढ़ गई थी कि उसने सीधा उस गांव में संदेश बिजवा डाला कि अगले पूर्णमासी की रात तक उस लड़की को सालम सिंह की हवेली पर पहुंचा दो वरना अगले दिन वह अपने सैनिकों के साथ उस गांव पर हमला कर देगा यह सुनकर लोग बहुत परेशान हो गए उन्हें समझ में नहीं आया था कि अब क्या करें क्योंकि पूर्णमासी की रात आने में बस कुछ ही दिन का वक्त रह गया था

Kuldhara Village History in Hindi 

उसके बाद गांव में पंचायत बुलाने का फैसला हुआ उसी दिन सारे 84 गांव के लोग एक मंदिर में इकट्ठा हुए उसके बाद अलग-अलग लोगों से राय ली गई किसी ने कहा कि हम साथ मिलकर के खिलाफ लड़ेंगे पर वह कुछ हजार लोग इतनी बड़ी सेना का सामना नहीं कर सकती थी किसी ने कहा कि वह परिवार वहां से चला जाये सालम सिंह के जुल्म के किस्से भी मशहूर थे उन्हें पता था

कि  इतना जुल्म करेगा कि वह लोग बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे गांव के लोगों ने एक फैसला एक गांव को छोड़कर वहां से चले जाएंगे उनका कहना था कि हम अपनी इज्जत का सौदा नहीं करेंगे चाहे कुछ भी हो जाए और शायद यही फर्क था उस टाइम के लोगों में और आज के लोगों में बहुत सारे लोग जिस तरह से एक लड़की की इज्जत को बचाने के लिए एक साथ आए यह अपने आप में एक मिसाल है

और आजकल के लोगों को सिर्फ अपने आप से मतलब रहता है क्या उसके पड़ोसी के साथ ही कुछ गलत क्यों ना हो रहा हूं उससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता और शायद यही चीज उन लोगों में नहीं थी खैर यह तो हुई इंसानियत की बात अब आते हैं कहानी थी जब गांव छोड़ने का फैसला हुआ तो उन्हें पता था कि अगर इसमें जरा सी भी देरी हुई तो यह बात कहीं ना कहीं से बाहर निकल जाएगी तब उसी रात उन लोगों ने गांव को छोड़ने का फैसला किया

और लोग वैसे कहा गया कि अपने साथ सिर्फ सबसे जरूरी और कीमती सामान लो और चलो उसके बाद लोगों ने जल्दी-जल्दी में अपनी जरूरी और कीमती सामान को उठाया और बाकी सामान जैसे पड़ा था वैसे ही छोड़ कर चल दिए  अपने उस हंसते खेलते गांव को छोड़कर कतार में एक साथ उसी रात खामोशी से निकल गए और जाते-जाते उस गांव को एक श्राप दिया आज के बाद यह गांव कभी नहीं बस पाएगा और जो यहां बसने की कोशिश करेगा उसका कभी अच्छा नहीं होगा उसके बाद वो रात बीत गई और दो-तीन दिन और बीत गए

Kuldhara Village Ghost Story in Hindi

और पूर्णमासी की रात को  सालम सिंह की हवेली पर नहीं आए तो अगले दिन जैसा कि उसने कहा था अपनी सेना के साथ दीवान सालम सिंह गुस्से में कुलधरा गांव की तरफ  पहुंचता है तो उसे चारों तरफ सन्नाटा ही नजर आता है वह पूरे 84 गांव को पर उसे एक भी शख्स नजर नहीं आता बाद में उसने अपने सैनिकों से वहां बहुत खुदाई भी करवाई क्योंकि पालीवाल लोग बहुत ही आमिर थे और खुदाई में भी बहुत कुछ मिला होगा पर इस बारे में कोई जानकारी नहीं है उसके बाद सैनिकों ने भी वहां बसने की कोशिश की क्योंकि कुलधरा गांव बहुत ही अच्छा बसा हुआ था और वहां किसी भी चीज की कमी नहीं थी

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हां कभी बस नहीं पाए और उनके साथ कभी अच्छा नहीं हुआ कहते हैं कि जो एक रात उस गांव में रुक जाता है वह बच नहीं पाता और कई लोग उस गांव में बसने के लिए गए तुझसे ही पर कभी वापस नहीं आए 2013 में पैरानॉर्मल सोसाइटी के लोग भी मान गए थे इस भूत प्रेत और आत्माओं की पड़ताल करने उनके पास एक डिवाइस होता है जो कि नेगेटिव एनर्जी की पहचान करता है

तो उन्होंने भी अपनी रिपोर्ट में वहां पर नेगेटिव एनर्जी होने की बात को माना और कुछ तो क्या हुआ था उनके डिवाइस में उस रात को वह गांव खाली करने के बाद बोलो कहां गए किसी को नहीं पता इतिहासकार कहते हैं कि वह लोग अलग-अलग जगह जाकर बस गए कभी वापस नहीं लौटे और तभी से यह गांव एक श्रापित और भूतिया जगह में बदल गया अगर आपका भी जैसलमेर जाएं तो कुलधरा जरूर घूमने जान आपको खुद यह सब चीजें महसूस होंगी

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