Hyperloop Train क्या है? | Hyperloop Train के फायदे और जानकारी | hyperloop

Hyperloop Train क्या है ? आज के समय में एक से एक नई तकनीक का आविष्कार हो रहा है। इतिहास गवाह है, मनुष्य ने पुराने समय से ही कुछ ऐसी तकनीकों का अविष्कार और विकास क्या है जो कि आज मानव जगत के लिए उपयोगी साबित हुई हैं जैसे पहिए का आविष्कार, ट्रेन का आविष्कार, जहाज का आविष्कार और बहुत से परिवहन साधनों का आविष्कार आदि शामिल हैं। भविष्य में इंसानों के पास वक्त की समस्या अधिक उत्पन्न होने वाली है क्योंकि हमारी जिंदगी इतनी तेज हो चुकी है कि हम किसी भी काम को कुछ ही पलों में करना चाहते हैं फिर चाहे इसमें कोई काम हो या यात्रा हो या किसी तकनीक से संबंधित कार्य हो, आज हर कोई अपने किसी भी काम को जल्द से जल्द खत्म करने की कोशिश में लगा रहता है।

Hyperloop in Hindi –

आज परिवहन के क्षेत्र में भी कम से कम समय को लेकर नए नए अविष्कार किए जा रहे हैं। जिससे कि हमारी किसी भी यात्रा में लगने वाले समय को कम किया जा सके और भविष्य में ट्रैफिक जाम जैसी बड़े-बड़े शहरों में इन समस्याओं से निजात मिल सके क्योंकि भविष्य में जनसंख्या वृद्धि भी इन सभी का एक मुख्य कारण होने वाली है। तो आज हम यात्रा को सुगम और कम समय मैं पूरा करने की ऐसी तकनीक Hyperloop Train क्या है ? के बारे में बताएंगे

जिससे कि अगर यह तकनीक आम आदमी की पहुंच तक आएगी तो उससे आदमी की धन और समय दोनों की बचत संभव है बहुत सी कंपनियां इस तकनीक पर कार्य कर रही है और यह तकनीक बहुत ही जल्द हमारे बीच में उभर कर आएगी तो चलिए दोस्तों आज हम इस तकनीक के बारे में विस्तार पूर्वक जानेंगे। आपकी जानकारी के लिए हम बता दें इस तकनीक का नाम है हाइपरलूप जोकि परिवहन क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी।

हाइपरलूप ट्रेन क्या है? what is hyperloop in Hindi

Hyperloop Train तकनीक किसी भी वाहन पर लगने वाली एयर फ्रिक्शन और एयर रेजिस्टेंस को खत्म करती है। जोकि एयर फ्रिक्शन और एयर रेजिस्टेंस किसी भी वाहन की गति को अवरुद्ध करने का कार्य करती हैं।
हाइपरलूप एक ऐसी ट्रेन है। जोकि मैग्नेटिक पावर से चलती है। और हाइपरलूप मैग्नेटिक पावर के सिद्धांत पर कार्य करती है इसमें बड़े और मजबूत खंभों के ऊपर एक कैप्सूल नुमा ट्यूब बिछाई जाती है जिसके अंदर एक ट्रेन बोगी हवा में तैरती हुई चलती है। इस ट्यूब के अंदर हवा के दबाव को कम किया जाता है जिससे कि चलने वाली ट्रेन को हवा के घर्षण की समस्या से निजात मिलती है और हाइपरलूप में चलने वाले परिवहन अधिक तेज गति से यात्रा को पूर्ण करती है।

Hyperloop Train किस तकनीक पर काम करती है?

हाइपरलूप को 5th mode of transportation यानी के परिवहन के क्षेत्र में पांचवा स्तंभ कहा जाता है।
आमतौर पर हम सभी देखते हैं कि जब भी कोई वाहन तेज गति से आगे बढ़ता है। तो हमारे ब्रह्मांड में चारों तरफ वायु होती है। और जब कोई वाहन गति पकड़ता है तब यह हवा और उस वाहन के बीच एक प्रकार का घर्षण पैदा होता है जोकि वाहन की गति को अवरोध करता है। हाइपरलूप मुख्य दो तकनीक पर कार्य करता है।

  • मैग्नेटिक पावर यानी के चुंबकीय शक्ति
  • रिड्यूस एयर फ्रिक्शन यानी वायु के घर्षण को कम करना

हाइपरलूप ट्यूब में हवा से होने वाले घर्षण को ना के बराबर कर दिया जाता है। अर्थात उस ट्यूब में से हवा को वैक्यूम के जरिए निकाल दिया जाता है जिससे हाइपरलूप ट्यूब में चलने वाले वाहन के बीच हवा से होने वाले घर्षण को कम किया जाता है। ताकि ट्यूब के अंदर चलने वाले वाहन को अधिक गति मिल सके। और साथ में हाइपरलूप ट्रेन में मैग्नेटिक पावर जिसको हम चुंबकीय शक्ति भी कहते हैं

इस तकनीक का भी प्रयोग होता है जो कि वाहन को व्यक्ति पकड़ते समय कुछ थोड़ा ऊपर उठा देती है। जिससे ट्यूब की सतह से भी घर्षण कम होता है।जिस से hyperloop ट्रेन को अधिक गति मिलती है। हाइपरलूप एक ऐसी एडवांस ट्रेन है जिसको एक कैप्सूल जैसी ट्यूब के अंदर हवा के दबाव को कम करके चलाया जाएगा।

हाइपरलूप ट्रेन की गति कितनी होती है? Hyperloop train speed in Hindi

हाइपरलूप वाहन किसी भी एयर फ्रिक्शन के बिना यात्रा तय करता है और साथ में उस में मैग्नेटिक फोर्स का यूज़ किया जाता है। जिससे हाइपरलूप किसी भी बुलेट ट्रेन को अपनी गति से पीछे छोड़ता है। हाइपरलूप की गति संभावित 1200 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। और भविष्य में इस गति को और भी बढ़ाए जाने के प्रयास जारी हैं।

हाइपरलूप ट्रेन तकनीक आविष्कार कब और किसने किया?

वैसे तो हाइपरलूप का विचार बहुत पुराना है तकरीबन 200 साल से भी ज्यादा लेकिन इस तकनीक को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया था उस वक्त। बात 1799 की है जब एक ब्रिटिश इन्वेंटर Jeorge Medhurst ने ट्रांसपोर्ट के लिए एयर प्रोफेशनल ट्यूब का पेटेंट अपने नाम कर आया था। और इसके बाद इस तकनीक के बारे में गुप्त रखा गया। साल 2013 में हाइपरलूप तकनीक में एक जान डालने के रूप में टेस्ला कंपनी और स्पेस एक्स के सीओ एलॉन मस्क इस तकनीक उजागर किया और इस तकनीक पर काम करना शुरू कर दिया।

एलोन मस्क के मुताबिक हाइपरलूप पोर्ट्स ज्यादा गति प्रदान करने वाले यंत्र होंगे जोकि किसी भी कार से ज्यादा सुरक्षित और किसी हवाई जहाज से ज्यादा पर्यावरण के लिए सुरक्षित होंगे। एलन मस्क ने हाइपरलूप के आइडिया को ओपन सोर्स राइट प्रदान किया अर्थात सर कंपनी के साथ साझा किया। जिससे कि भविष्य में अधिकतम कंपनियां इस तकनीक पर काम कर सकें ताकि हाइपरलूप ट्रेन जल्दी से जल्दी बाजार और मानव जगत के लिए उपयोगी साबित हो।

वर्तमान समय में हाइपरलूप ट्रेन बनाने वाली कंपनियां कौन सी है?

वैसे तो 2013 से इस तकनीक पर काम किया जा रहा है जिसकी शुरुआत एलोन मस्क कि कंपनी ने शुरुआत की थी और धीरे-धीरे बहुत सी कंपनियां हाई पर लो तकनीक पर काम करने में जुट गई है जो कि इस प्रकार हैं।

1 virgin hyperloop one
2 HTT
3 Transpod
4 Arrivo
5 Lix hyperloop Network
6 Hyperloop India
7 Acom
8 Dinclix Groundworkers Company
9 Infi Alfa

Hyperloop ट्रेन रूट को निर्धारित किए गए है?

हाइपरलूप तकनीक पर बहुत से देश काम कर रहे हैं। और इस हाइपरलूप को चलाने के लिए काफी रूट निर्धारित किए गए हैं जो किस प्रकार हैं भविष्य में इन देशों में और इन रूट पर आपको हाइपरलूप वाहन चलते हुए दिखाई देंगे।

अमेरिका –
Chicago-Columbus-Pittsburgh
488 miles, proposed travel time: 49 minutes
Dallas-Laredo-Houston
640 miles, proposed travel time: 48 minutes
Cheyenne-Denver-Pueblo
360 miles
Miami-Orlando
257 miles, proposed travel time: 28 minutes

मैक्सिको –

Mexico City-Guadalajara
330 miles, proposed travel time: 40 minutes

इंडिया –
Bengaluru-Chennai
208 miles, proposed travel time: 25 minutes
Mumbai-Chennai
685 miles, proposed travel time: 66 minutes

कनाडा –
Toronto-Montreal
400 miles, proposed travel time: 39 minutes

यूनाइटेड किंगडम –
Edinburgh-London
414 miles, proposed travel time: 51 minutes
Glasgow-Liverpool
339 miles, proposed travel time: 48 minutes

हाइपरलूप ट्रेन कहां बन रहे हैं?

Virgin Hyperloop One के अलावा और भी दूसरी कंपनिया इस परिवहन पद्धति की बाधाओं को दूर करने वाली कंपनियों में हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजीज (हाइपरलूपटीटी) एक यूएस-आधारित स्टार्टअप आदि काम कर रही है। चीन में एक परीक्षण ट्रैक बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और नीदरलैंड में हार्ड्ट हाइपरलूप और एक कनाडाई कंपनी ट्रांसपोड भी hyperloop बना रही है।

हाइपरलूप ट्रेन के क्या-क्या फायदे हैं? What is advantages of hyperloop in Hindi

हाइपरलूप भविष्य का परिवहन स्तंभ साबित होने वाला है तकनीक से मानव के विकास की दिशा बदलने में सहायता मिलेगी। इस तकनीक से होने वाले फायदे इस प्रकार हैं
हाइपरलूप तकनीक एक पर्यावरण के अनुकूल तकलीफ है जोकि पर्यावरण को बिना किसी नुकसान पहुंचाए स्थापित की जाएगी
क्योंकि ना तो इसमें कोई ध्वनि प्रदूषण होगा और ना ही कोई उत्सर्जन प्रदूषण पैदा होगा

इस तकनीक में होने वाली ऊर्जा के खर्च को कम किया जाएगा जिससे दूसरी ट्रेनों में ज्यादा विद्युत ऊर्जा की खपत को एक समस्या के रूप में देखा जाता है
हाइपरलूप ट्रेन इतनी ज्यादा तेज होंगी कि हम किसी भी 3 घंटे की यात्रा को मात्र केवल 20 से 30 मिनट में पूर्ण कर सकेंगे
हाइपरलूप ट्रेन सीधा निर्धारित किए हुए डेस्टिनेशन पर ही रुकेगी जिससे कि समय की अधिक बचत हो पाएगी जैसे आम ट्रेनें हर स्टेशन पर रूकती चलती हैं हाइपरलूप ट्रेन बीच में किसी भी स्टेशन पर नहीं रुकेगी।
Hyperloop तकनीक देखने में बहुत ज्यादा महंगी लगती है लेकिन अपने कुछ एडवांस तकनीक के कारण यह ज्यादा एक्सपेंसिव नहीं होगी। जिसका असर उपयोगकर्ता पर भी ज्यादा नहीं पड़ेगा।

Hyperloop Train के नुकसान क्या क्या है? What is disadvatange of Hyperloop train in Hindi

जब भी कोई एडवांस तकनीक पर प्रोसेस होकर हमारे लिए तैयार होती है तो उस तरीके फायदा के साथ-साथ नुकसान भी हमें देखने को मिलते हैं जैसे कि
हाइपरलूप ट्रेन एक ट्यूब के अंदर चलती है जिसके अंदर जगह बहुत कम होती है जिसके कारण और को एकदम किसी डेस्टिनेशन पर घूमा की स्थिति में स्पेस बहुत कम प्राप्त होता है और तेज गति होने के कारण स्केटिंग से टकराने की संभावना अधिक हो जाती है

इस तकनीक को पूरे विश्व में पूरी तरह से सक्रिय करने के लिए बहुत सी जगह की जरूरत पड़ेगी और इसकी ट्यूब बिछाने के लिए शायद बहुत से पेड़ पौधों को अपनी कुर्बानी देनी पड़ सकती है अगर सच में ऐसा हुआ तो यह हमारे पर्यावरण के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
हाइपरलूप ट्रेन की स्पीड इतनी अधिक होगी कि उस में सफर करने वाले व्यक्ति ज्योतिष में पहली बार सरकार करेंगे उनको सर चकराने की समस्या उत्पन्न हो सकती है

Hyperloop Train के लिए चुनौतियां –

हाइपरलूप ट्रेन को विश्व में पूरी तरह से क्षत्रिय करने के लिए बहुत सी चुनौतियां का सामना करना पड़ सकता है जैसे कि
इस तकनीक में एक कैप्सूल जैसी ट्यूब बिछाई जाएगी और हर देश की वातावरण अलग अलग होता है जिससे कि यूट्यूब के सिकुड़ने और फैलने की समस्या उत्पन्न हो सकती है जोकि अपने आप में एक चुनौती के रूप में उभर सकती है
शुरुआत में इसके लिए थोड़ा महंगा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना एक चुनौती के समान है।

Calculation –

तो अंत में यह कह सकते हैं कि हाइपरलूप एक एडवांस तरीके की ट्रेन होगी जो कि मानव जगत को एक नई दिशा प्रदान करने का कार्य करेगी। आज विज्ञान बहू से क्षेत्र में एक से एक खोजें और तरक्की कर रहा है और हाई पर लोग तकनीक भी विज्ञान के लिए एक अच्छा परिणाम साबित हो सकेगी।

हाइपरलूप ट्रेन के बारे में यहां तक कहा जा चुका है कि जब यह ट्रेनिंग सफलतापूर्वक अपनी यात्रा के लिए रवाना होगी तो इनकी गति इतनी तेज होगी की किसी भी बुलेट ट्रेन से दुगनी रफ़्तार से हाइपरलूप ट्रेन यात्रा को पूर्ण करेंगी। और इससे भविष्य में ट्रेनों में होने वाली भीड़ और देरी जैसी आम समस्याओं से निजात पाने में मदद मिलेगी।

तो दोस्तों आज आपने इस लेख में Hyperloop Train क्या है? हाइपरलूप कैसे काम करता है और हाइपरलूप के बारे में पूरी जानकारी के बारे में जाना है। और हमने इस लेख में आपको हाइपरलूप क्या है इसके बारे में भरपूर जानकारी देने की कोशिश की है। अगर Hyperloop Train क्या है संबंधित आपका कोई भी प्रसन्न हो तो आपको मेंट बॉक्स में हो सकते हैं।

 

 

 

 

 

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