Dragon Triangle in Hindi : ड्रैगन ट्रायंगल के अनसुलझे रहस्य

Dragon Triangle in Hindi – ड्रैगन ट्रायंगल का नाम सुनते ही लोगों के मन में कई तरह के सवाल पैदा हो जाते है। कि आखिर क्यों इस इलाके में आते ही समुद्री जहाज अचानक गायब हो जाते हैं। यहाँ तक कि आसमान में उड़ रहे जहाज भी हादसे के प्रकोप से बच नहीं पाए। अब तो सिर्फ लोग जानते थे, कि दुनिया में सिर्फ एक बरमूडा ट्रायंगल ही ऐसा है। जहां जहाजों के गायब होने का एकमात्र कारण है।

लेकिन जापान का एक समुद्री इलाका भी है। जिसे अब ड्रैगन ट्रायंगल के नाम से जाना जाने लगा है। इसकी वजह है जहां सालों से जहाज गायब हो रहे है। जो भी जहाज इस ट्रायंगल के ऊपर से गुजरता है। उन जहाजों का आज तक कोई सुराग भी नहीं मिल पाया। इस जगह का नाम द ड्रैगन ट्रायंगल हैं। जहां जापान का यह समुद्री इलाका बहुत ही खतरनाक माना जाता है।

Dragon Triangle in Hindi – ड्रैगन ट्रायंगल के अनसुलझे रहस्य 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये ट्रायंगल भी जहाजों को निगल रहा है। अब तक 10 से ज्यादा समुद्री जहाज गायब हो चुके हैं। साल 2012 में भी एक जहाज इस इलाके में आते ही अचानक गायब हो गया था।  इस जहाज में 12 क्रू मेंबर सवार थे। लेकिन आज तक उनका कोई पता चल पाया, इसके बारे में कोई भी जानकारी हाथ नहीं लगी।

इस जगह पर जाते ही लोकेशन कंपास में भी अपने तारीख से खुद-ब-खुद बदलती है।  जिसकी वजह से ऐसी विचित्र घटनाएं जहां पर आए समय होती रहती हैं।  जापान की गवर्नमेंट ने यहां पर कुछ लोगों को तकरीबन 30 लोगों को सर्वे के लिए भेजा था।  लेकिन वहां से कोई भी वापिस नहीं लौट कर नहीं आ पाया।

कि ड्रैगन ट्रायंगल बरमूडा ट्रायंगल के बिल्कुल विपरीत है। इतना ही नहीं हादसे ज्यादा खतरनाक होते हैं, यही कारण है, इससे दुनिया का दूसरा बरमूडा ट्रायंगल कहा जाता है।  समुद्री क्षेत्र में होने वाली सारी घटनाओं की वजह से जापान सरकार ने इस पूरे समुद्री क्षेत्र पर प्रतिबंध घोषित किया है। जापान सरकार का भी मानना यही है। इस तरीके की रहस्यमई घटनाएं होती है।

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कि साल 1955 में जापान के लोग युद्धक विमान में कुछ माल भेजना चाहती थी। अचानक इस इलाके से गायब हो गए थे। बाद में इन जहाजों का पता लगाने के लिए जापान ने अपना एक विशेष जहाज भी भेजा था। लेकिन कुछ दिनों बाद वह जहाज भी रहस्यमय तरीके से हर जगह से गायब हो गया था और न ही उन जहाजों की दिशा का पता चला पा रहा था।

उस जहाज की आखरी लोकेशन ड्रैगन ट्रायंगल ही थी। ड्रैगन ट्रायंगल की लोकेशन को राडार में भी देखा गया था। उस वक्त भी चंगेज खान ने भी जापान में घुसने की कोशिश की थी। जो कि मंगोल साम्राज्य के महान राजा थे।  हालांकि दोनों प्रयासों पर इस त्रिकोणीय क्षेत्र में नहीं घुस पाए और 40,000 चालक दल के सदस्यों को खोने के बाद आक्रमण करने में विफल रहे।

डर्बीशायर शिप 

यह सब चीजें आज की टेक्नोलॉजिकल दुनिया में रहने वाले लोगों को भी चौंका देती है। सितंबर 8 1980 को डेढ़ लाख टन वजन के साथ डर्बीशायर नाम का एक जहाज अपनी डेस्टिनेशन की तरफ आगे बढ़ रहा था। टाइटैनिक से 2 गुना बड़ा और सबसे रिपीटेड जहाज होने के साथ के जहाज अंदर के लोग सपने में भी नहीं सोच सकते थे।

इस पावरफुल जहाज में इन्हें कुछ हो सकता है। पर 1 दिन बाद सितंबर 9 1980 को डर्बीशायर जहाज रहष्यमयी तरीके से लुप्त हो गया। उस समय की ब्रिटेन की सबसे बड़ी शिप के गायब होने को कोई नहीं समझ सका। कि आखिर गायब कैसे हो इतने एक्सपीरियंस मेंबर्स के होने के बावजूद ऐसा जहां कोई सोच भी नहीं सकता था। कि इसके साथ ऐसा कभी होगा।

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यह बरमूडा ट्रायंगल के बारे में तो सभी को पता है। पर इस ड्रैगन ट्रायंगल एरिया के बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं। इसका नाम ड्रैगन ट्रायंगल है इस रहस्यमई एरिया में एरोप्लेन गायब हुए गायब होने की घटनाओं को देखकर हर किसी को लगता था। कि इस जगह पर जाकर इसकी रिसर्च करनी चाहिए। इसी के चलते एरिया के बारे में और पता करने के लिए जापान की गवर्नमेंट द्वारा कई दलों को जांच करने के लिए भी भेजा गया था।

की वो जहाज आखिर कहाँ जाते है। कई जगहों से रिसर्च टीम को बुलाया गया इन सब पैरानॉर्मल एक्सपर्ट टीमों को पूरी तैयारी के साथ भेजा गया। वह लोग गए तो सही पर वापस कभी नहीं आई और कहां चली गई किसी को नहीं पता, कि रिसर्च करने वाली टीम ने वहां से गायब हो गई। उसके बाद गवर्नमेंट भी फिर से किसी भी टीम और शिप को उस जगह पर आज तक नहीं भेजा।

Wikipedia ड्रैगन ट्रायंगल के बारे में

विकिपीडिया में इस जगह के बारे में पढ़ोगे। तो आपको देखने को मिलेगा, एंड एक्जिस्टेंस एंड फाइनली डेंजर जापान सरकार द्वारा भी इस जगह को डेंजर जोन घोषित कर दिया गया।  सिर्फ सेटेलाइट उस जगह की रिसर्च की गई तभी ही पता चला, कि यह बिल्कुल बरमूडा ट्रायंगल की तरह ही एक त्रिकोण बनाती है। पर यह तो बस शुरुआत थी, सबसे अजीब बात यह कि बिल्कुल उसी एलाइड पोजीशन में मौजूद है। जहां बरमूडा ट्रायंगल आप यहां देख सकते हो। यह दुनिया के इस साइड में है। और वह दुनिया के उस साइड में है।

और इसी के चलते यह भी माना जाता है। कि इन दोनों जगहों का आपस में कोई कनेक्शन है। जापान की गवर्नमेंट की एडवांस रिसर्च को भी निगल गए।  तब आप सोच ही सकते हो, की जगह कितनी खतरनाक होगी। इतने घटनाओं के बावजूद कई लोगों को लगता था कि यह सिर्फ बकवास चीजें है। बहुत सारी  ऐसी बातें सामने आई यही समझाने की कोशिश करती है।  कि आखिर ऐसा क्यों होता है।

ड्रैगन ट्रायंगल के बारे में शोधकर्ताओं के विचार

लोगों के ग्रुप का यह कहना है।  कि समुद्र के नीचे बहुत सारे अननोन सोर्सेस मौजूद है। क्योंकि इंसानों को गायब करते हैं उनका यह कहना है कि यहां पर ड्रैगंस मौजूद जहाजों को निकल लेते हैं।  सुनने में अजीब लगता है, पर जब ऐसी घटनाएं होती है।तो हमें विज्ञान से हट कर सोचने की जरूरत होती है। दूसरे ग्रुप का यह मानना है। कि समुद्र के नीचे एक पोर्टल जो जहाजों को दूसरे आयाम में खींच लेते हैं। एरोप्लेन को एक दूसरी दुनिया में ले जाती है। यह भी सुनने में बहुत अजीब लग रहा है।

पर आपको यह समझना चाहिए। कि जहां से आज के आधुनिक युग में भी गायब होती रहेगी। अभी तक इसका कोई साइंटिफिक एक्सप्लैनेशन किसी के पास नहीं है। पर 1987 में जब यह सब घटनाएं होनी शुरू हुई थी। जब भी कोई रिसर्च करने जाता खो जाता और कोई लौट के वापस नहीं आता। आपके मन में आ रहा होगा। कि पहले किसी ने इसे बनाया होगा।  तो जानकारी के लिए मैं आपको बता दूं, कि जापान का जितना भी इंसेंट हिस्ट्री है। सब कुछ देखा गया पर इसका जिक्र कहीं नहीं है।  इसी किसने बनाया कोई नहीं जानता।

टाइम डेलेशन के बारे में

पूरे ड्रैगंस ट्रायंगल के बॉर्डर पर जहां पर यह शुरू होता है। वहां ऐसी मॉन्यूमेंट्स बनी हुई है। आप इस जगह पर गए हो तो क्या जानते हो, लोगों के अनुभव और उन रिपोर्ट की माने तो आपका कंपास इस जगह काम करना बंद कर देगा।

और जिसने इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट्स हैं। वह ठीक से काम नहीं करें बिजली से चलने वाले उपकरण और इस जगह का आपस में एक बहुत बड़ा कनेक्शन है।  अब आप ही बताइए, कि ऐसा कैसे संभव हो सकता है।

बरमूडा ट्रायंगल और ड्रैगंस ट्रायंगल दोनों जगहों पर ऐसी घटनाएं भी हुए इस जगह पर टाइम dilation होती है। यह टाइम dilation कोई समय चीज नहीं है।  विज्ञान की दुनिया में यही बहुत फेमस कंसेप्ट अंतरिक्ष में ब्लैक होल के सामने से अगर कोई चीज़ गुजरती है। तब उसके लिए समय स्लो हो जाता है।  मतलब अगर आप 7 दिन के लिए स्पेस में गए और ब्लैक होल के सामने से चक्कर लगा।  कि आप धरती पर जब वापस आएंगे, तब आपके लिए तो 7 दिन ही दिन देते होंगे और वापस आकर आप देखोगे कि 7 साल बीत चुके हैं। टाइम डेलेशन की दुनिया की ऐसी चीज है। जो असल दुनिया में भी होती है। साइंटिफिकली ये कोई अजीब बात नहीं है।

CALCULATION

बरमूडा ट्रायंगल और ड्रैगन ट्रायंगल की दोनों जगह दुनिया की उन रहस्मयी स्थानों में से एक हैं। जहां विज्ञान चाह कर भी पता नहीं लगा पा रहे, कि आखिर वहां हो क्या रहा है। ऐसी रहस्य सच में हमें विज्ञान की परी सोचने पर मजबूर कर देते हैं।

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