BS4 और BS6 क्या होता है : bs6 full form in hindi : BS4, BS6 में क्या अंतर है

BS4 और BS6 क्या होता है ? [BS6 Full Form]

Bs4 और Bs6 क्या होता है? अक्सर जब से सेंटर govt की ये पॉलिसी आई है। तब से हर वाहन के मालिक को चिंता है। कि कब उनका वाहन स्क्रैप पालिसी के तहत  कबाड़ हो जाए और हो भी क्यों ना, क्यूंकि वहां लेना हर आज के दौर में बहुत मेंहगा हो गया गया है। जिससे वाहन के लिए हर वाहन मालिक की जेब पर असर पड़ता है। क्यूंकि वाहन लेने के साथ साथ उस के पंजीकरण पर लगने वाले टैक्स बहुत सारे है। जिस से वाहन की कीमत बढ़ जाती है। तो आज हम बात करते है। कि आखिर ये bs4 और bs6 क्या चीज़ है। जिसका काफी शोर मचा हुआ है।

BS6 Full Form

भारत स्टेज 6 (BS6) या भारत स्टेज VI (BS VI), एक उत्सर्जन मानक है। भारत स्टेज (बीएस) मानदंड एक मोटर वाहन से वायु प्रदूषकों के उत्पादन को विनियमित करने के लिए भारत सरकार द्वारा स्थापित उत्सर्जन मानक हैं। BS6 इंजन BS4 इंजनों की तुलना में कम मात्रा में जहरीली गैसों का उत्सर्जन करते हैं

ये एक तरह की प्रदूषण की पैदा या डिफाइन करने वाली norm है। जिसको अलग अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। जो की किसी भी वाहन के इंजन से निकलने वाले प्रदूषण को दर्शाने है। की को श्रेणी का वाहन कितना प्रदूषण उत्तपन करता है। सन 2000 से  हर वाहन कि ये norm श्रेणी euro1 थी। जिसको हम BS1 भी कह सकते है। और उस समय से लेकर अब तक यानी 2020 तक euro6 यानी BS6 तक का सफर तय किया है। जिसमें समय समय पर लागू किया गया और तकनीक में बदलाव किए गए। जिसकी चर्चा हम विस्तारपूर्वक आगे करेंगे।

वाहन के धुएं से को सी गैस निकलती है?

वाहन के धुएं से निकलने वाली गैस इस प्रकार है। जो कि हमारे वातावरण के लिए काफी नुकसान दायक भी है।

  • नाइट्रोजन ऑक्साइड 
  • टोटल हाइड्रोकार्बन ( THC)
  • नोन मिथिन हाइड्रोकार्बन ( NMHC)
  • कार्बन मनोआक्साइड ( CO)
  • Particulate Matter (PM)

जो की हमारे जन जीवन पर बहुत बुरा असर डालती है। इन सभी गैस का उत्सर्जन होता है।

बीएसईएस BSES की है ?

भारत में इन मानकों निर्धारण बीएसईएस के द्वारा किया जाता है। जिनको हम Bharat Stage Emission Standards कहते है। ये ऑटो इंडस्ट्री में तय करता है। कि कब नए वाहन को से तकनीक के भारत के बाज़ार में उतारे जाए। जिस से कम से काम प्रदूषण हो जो आम जन जीवन और पर्यावरण के लिए फायदे मंद हो।

BS1 कब लागू हुआ ?

सन 2000 में वाहन के प्रदूषण मानक निर्धारित किए गए जिसको euro 1 का नाम दिया गया। अर्थात बीएस 1ये सिर्फ एक ही साल रहे।

BS2 कब लागू हुआ था ?

सन 2001 में भारत स्टेज एमिशन स्टैंडर्ड ने BS 2 को लॉन्च किया। और 2001 से सभी वाहन के इंजन bs 2 की निर्धारित तकनीक पर बनाए जाने लगे। जिसे केवल एनसीआर में ही लागू किया गया था। सन 2003 में 14 और प्रमुख शहरों में इसे लागू किया गया, और 2005 तक इस तकनीक को पूरे देश में अनिवार्य कर दिया गया।

BS3 कब लागू किया गया था ?

सन 2005 से लेकर 2010 अप्रैल से पहले बीएस3 को बंद कर दिया गया था। अप्रैल 2010 के बाद बीएस4 को लागू किया गया था। जिस से पर्यावरण के प्रदूषण में सुधार किया जा सके, ये तकनीक 2010 से 2019 के अंत तक रही थी।

BS4 को कब लागू किया था ?

2010 के बाद भारत में 2019 तक BS 4 तकनीक को लाया गया। जिस से प्रदूषण कम करने में मददगार साबित हुई, उसके बाद BS5 को छोड़कर सीधा 1 april 2020 को BS6 norm तकनीक को लाया गया। बीएस 6 को  को पूरे देश में अनिवार्य कर दिया गया।

इन मानकों को लागू करने के क्या उद्देश्य है?

1 ईन मानकों में ये निर्धारित किया जाता है। कि किसी भी वाहन से निकलने वाले धुएं में प्रदूषण की कितनी मात्रा होती है।
2 प्रदूषण की मात्रा को कम करने के लिए वाहन निर्माता वाहन और इंजन की नकनिक में बदलाव करने के लिए नई से नई तकनीक का प्रयोग करते है।
3 इन मानकों में तकनीक के साथ साथ वाहनों में प्रयोग होने वाले ईंधन की गुवक्ता को भी निर्धारित किया जाता है।
4 इन मानकों को लागू करने के पीछे उद्देश्य सिर्फ अपने पर्यावरण में हो रहे वाहनों के प्रदूषण की रोकथाम के लिए किया गया है। ताकि हम एक साफ वातावरण में रह सके, जिस से आम जन जीवन पर कोई बुरा असर ना पड़े।

Bharat Stage Emission Standards क्या है ?

BSES एक वाहन प्रदूषण को नियंत्रित करने वाली तकनीक का सृजन करती है। जो समय समय पर वाहनों के इंजन से निकलने वाले प्रदूषण को काम करने की नई विधियां त्यार करती है। BS तकनीक योरोपीय देशों की तर्ज पर काम करती है। ये तकनीक पहले यूरोप के देशों में विकसित हुई थी। जिस से वातावरण में वाहन के धुएं से निकलने वाली गैसों को कम किया गया था। यूरो norm को हम भारत norm के नाम से विकसित कि है। जिसको समय समय पर पूरे भारत में लागू किया गया है।

BS4 और BS6 क्या है

जैसा कि हमने पहले भी बताया है, BS4 और BS6 में क्या अंतर होता है? कि ये बीएस norm एक तरह की प्रदूषण को कम करने की तकनीक है। जिसको समय समय पर वाहनों में विकसित किया गया, ताकि वाहनों से निकलने वाले धुएं से प्रदूषण की मात्रा कम की जा सके।

BS4 और BS6 में क्या फर्क होता है ? 

बस4 एक पुरानी norm है। जिसमें वाहन के धुएं से निकलने वाली गैस BS6 के मुकाबले में ज्यादा विसर्जित करती थी। इस norm में 2010 से 2019 तक इस्तेमाल कि गई तकनीक काम करती थी। Bs6 तकनीक में वाहनों में प्रयोग होने वाले इंजनों में बीएस6 norm विकसित की जाएगी। जो की बीएस4 के मुकाबले बहुत कम मात्रा में धुएं से निकलने वाले कार्बन और अन्य प्रदूषित गैसों को पैदा करेगी।

BS6 Engine Technology

BS4 इंजन से 1 किलोमीटर तक उस वाहन के धुएं से 1.900 g/km निकलता है। जो कि बीएस6 में नई तकनीक से कम कर दिया गया।
BS6 इंजन से निकलने वाले धुएं से गैस की मात्रा को 1 किलोमीटर तक चलने में 1.000 g/km कर दिया गया है। और ये मात्रा अलग अलग श्रेणी के वाहनों में अलग होगी। क्यूंकि हर वाहन के इंजन का साइज बड़ा होगा ये आंकड़ा जो बताया गया है। वो सिर्फ आपको बीएस4 और बीएस6 में फर्क बताने के लिए दिखाया गया है। जो की 2 व्हीलर के हिसाब से है।

फ्यूल बर्न गैस का क्या असर होता है ?

कार्बन मनोआक्साइड और हाइड्रोकार्बन ये 2 गैस मुख्य पेट्रोल वाले इंजन से reduce होती है। जो कि मानव जीवन पर कुछ असर डालती है। इस के संपर्क में आने से स्वास्थ्य सम्बन्धी कई बीमारियां होती है। जैसे उल्टी आना ,सिर चकराना और सांस की बीमारी आदि इन गैस से आंखों में एक अजीब सी जलन होती है। और नाक में एक तीखी गंध महसूस होती है। Nitrogen oxides और particulate matter ये 2 gases मुख्य डीजल इंजन से निकलती है। जो कि ज्यादा नुकसानदायक होती है। जो सीधा हमारे स्वास तंत्र को बाधित करती है। और नियमित इसके संपर्क में रहने से सांस की बीमारी दमा जैसा घातक रूप के जाती है।

बीएस 6 का भारत की वाहन उद्योग पर क्या असर पड़ेगा | BS6 Vahicles

 

bs4 aur bs6 kya hai

 

बीएस 6 एक एडवांस तरह कि तकनीक है। जो कि वाहनों में उपयोग करने पर खर्च को बड़ा देता है। जिसका असर वहां निर्माता company और वाहन उपभोक्ता दोनों पर पड़ेगा।

BS6 Fuel In Hindi

1 BS 6 में प्रयोग होने वाले ईंधन में सुधार करना अवयशक है। जो कि कुछ समय बाद पेट्रोलियम इंडस्ट्री को करना पड़ेगा, जो कि काफी लागत का काम होगा। जिस पर अरबों रुपए खर्च होंगे जिस से ईंधन कि कीमतें बढ़ेगी जो सीधी वाहन चालकों की जेब पर असर डालेगी।

ऑटो इंडस्ट्री के लिए एक एक चुनौती

2 अब तक भारत में लगभग 3 से 4 साल तक बीएस 4 रहा था। जिसके मुताबिक सभी वाहनों के इंजन बनाए गए थे। लेकिन बीएस 6 ऑटो इंडस्ट्री के लिए एक एक चुनौती के रूप में सामने आएगी, क्यूंकि सरकार ने बीएस 6 को लागू करने के कड़े निर्देश दिए है।

और वहां निर्माताओं को अपना बस4 का पुराना अलॉट से काफी घाटा हुआ, और ऑटो इंडस्ट्री कुछ समय के लिए down जा रही है। क्यूंकि जब इस बीएस 6 norm को लागू किया गया। उस समय देश corona नाम की महामारी से जूझ रहा था। जिस के करके ऑटो इंडस्ट्री कुछ समय के लिए थम गई थी।

3 बीएस 6 norm के लिए जो तकनीक इस्तेमाल होगी, उस के लिए वाहन engine में बहुत से extra पार्ट लगाने पड़ेंगे। जिसको लगाने से वाहन के कीमत ने बढ़ोतरी करनी होगी, क्योंकि बीएस 6 में वाहन के engine का बहुत सा स्ट्रक्चर बदलना होगा।

4 इस बीएस 6 में DPF किट और SCR मॉड्यूल को वाहन में फीट करना अपने आप में एक चैलेंज वाली बात है। क्युकी भारत में 65% छोटी hatchback और sedan car की डिमांड ज्यादा है। जो कि साइज के मुकाबले छोटी होती है। इन दोनों किट को फीट करने के लिए इंजन assembly और वाहन के डिजाइन में बदलाव करने पड़ेंगे।

बीएस 6 तकनीक में क्या बदलाव होंगे?

बीएस 6 तकनीक में बहुत से extra part वाहन के इंजन और वाहन की स्ट्रक्चर में फीट होंगे जिनका जिक्र हम अब करेंगे।

  •  जिन वाहनों में पहले carborator का use होता था। बीएस 6 में वो बिल्कुल बंद कर दिया गया है।
  • इसकी जगह फ्यूल को spray करने के लिए फ्यूल इंजेक्टर दिए गए है। ताकि फ्यूल सही मात्रा में पूरा जल सके ये तकनीक सिर्फ काबोटर वाले इंजन में ही बदलेगी, क्यूंकि 4 व्हीलर्स में इंजेक्टर पहले आ चुके थे।
  • डीपीएफ ये फिल्टर वाहनों के लिए लिए एक इंटरनल कंपोनेंट होगा। जिसको इंजन के इंटरनल कंपार्टमेंट में फीट किया जाएगा। जो कि फ्यूल को अच्छी तरह से बर्न होने में मदद करेगा। जिस से की गैस कम मात्रा में reduce हो।
  • नाइट्रोजन ऑक्साइड गैस को कम करने के लिए SCR मॉड्यूल पार्ट फीट होगा। जो नाइट्रोजन ऑक्साइड को इंजन में recycle करेगा।
  • दो पहिया वाहन में फ्यूल कार्बोरेटर की जगह फ्यूल इंजेक्टर दिए जाएंगे, जो कि ECM से ऑपरेट होंगे जिसकी मदद से इंजन एक हाइब्रिड इंजन के रूप में काम करेगा।

और अंत में हम आशा करते है। कि आज हमने जो BS4 और BS6 के बारे में पूरी जानकारी देने की भरपूर कोशिश की है। और अगर आपका कोई भी  BS4 और BS6 से जुड़ा सवाल हो, तो हमें जरूर कमेंट बॉक्स में पूछ सकते है। आपका फीडबैक हमारे लिए बहुत ही उपयोगी है।

4 thoughts on “BS4 और BS6 क्या होता है : bs6 full form in hindi : BS4, BS6 में क्या अंतर है”

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